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स्ट्रोक से बचना है तो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें

ब्रेन स्ट्रोक भारत सहित पूरे विश्व में मृत्यु और विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। जीवनशैली और खानपान की आदतों में बदलाव के कारण आज उम्रदराज लोग ही नहीं युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। भारत में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति स्ट्रोक की चपेट में आता है और हर चार मिनिट में स्ट्रोक के कारण किसी की मृत्यु होती है। उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का एक प्रमुख कारक है इसे नियंत्रित कर इसके खतरे को 30-40 प्रतिशत तक कम किा जा सकता है। 

ब्रेन स्ट्रोक 

मस्तिष्क की लाखों कोशिकाओं की जरूरत को पूरा करने के लिए कईं रक्त कोशिकाएं हृदय से मस्तिष्क तक लगातार रक्त पहुंचाती रहती हैं। जब रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है, तब मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं। इसका परिणाम होता है दिमागी दौरा या ब्रेन स्ट्रोक। यह मस्तिष्क में ब्लड क्लॉट बनने या ब्लीडिंग होने से भी हो सकता है। रक्त संचरण म रूकावट आने से कुछ ही समय में मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं क्योंकि उन्हें ऑक्सीजन की सप्लाकई रूक जाती है। जब मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने वाली नलिकाएं फट जाती हैं, तो इसे ब्रेन हमरेज कहते हैं। इस कारण पक्षाघात होना, याददाश्ता जाने की समस्या, बोलने में असमर्थता जैसी स्थिति आ सकती है। कई बार 'ब्रेन स्ट्रोक' जानलेवा भी हो सकता है। इसे ब्रेन अटैक भी कहते हैं।  


में रक्त को पतला करने वाली दवाईयां कारगर नहीं होती जिनकी रक्त कोशिकाएं अत्यधिक संख्या में ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसे मामलों में न्यूरोइंटरवेंशन तकनीक के द्वारा रक्त के थक्का को निकालकर रक्त संचरण को पुनः प्रारंभ किया जाता है। उपचार के बाद भी आवश्यक 

सावधानियां बरतना जरूरी है क्योंकि एक बार स्ट्रोक की चपेट में आने पर पुनः स्ट्रोरक का हमला होने की आशंका पहले सप्ताह में 11 प्रतिशत, और पहले तीन महीनों में 20 प्रतिशत तक होती है।

डॉ.जयदीप बंसल एच ओ डी, सीनियर कंसल्टेंट
न्यूरोलॉजी सरोज सुपरस्पेशेलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली

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